Friday, 24 August 2018

बूँद

बूँदों का समंदर
एक बूँद छिटक गई,
मरूधरा पर
गिरते ही समर्पित,
हवा के साथ  घुलकर
बूंद का अस्थिपंजर,
 बिलकुल सुखी,जर्जर
छूआ तों टूट गई,
बिखर गई
वो तो रेत थीं रेत
जय हिन्द

10 comments: