Thursday, 20 September 2018

बादल

नीले आसमां में बादल का कारवां
जेठ दुपहरी में आ गया
श्वेत-सी सूरत
धुंधला-सा
एकदम सुखा-सुकडा
तड़पते देखा
छटकते देखा
एक बूँद का प्यासा
अथाह गागर लिए
खुली है धरती तेरे सामने
डूब जा
सुखा ले सारी मस्तियाँ
जेठ देखेगा,जलेगा
तेरा भी अभिमान है
अहंकार है
घेर ले चारों ओर से
निगल जा नभ का तारा
कर दे अंधियार
अपनी बैछारों के वेग से
तोड़ दे अचल का सिना
उड़ेल दे छोटी धारा में यौवन
चंचल कर दे उसका मन
लांघ ले वो किनारों कों
फिर चल हो जा रवाँ
नीले आसमां में बादल का कारवां

जय हिन्द

Wednesday, 12 September 2018

मन
पांच अश्व का सारथी तु
नयन मूँदे बैठा मैं
तेरे उपद्रव के कारण
अकारण ही घिर जाता मैं
अस्तित्व अदृश्य है तेरा
शून्य से सृजन मेरा
भावों के जगत से तु
ज्ञान का भंडार मेरा
कर्म की बेडियाँ लगाए
पाप पुण्य का हिसाब मांगे
समय चक्र बलवान है
तू भी कितना महान है 
विषयों के चिंतन से 
आसक्ति  प्राप्त होता है

जय हिन्द