Monday, 13 January 2020

रात-चाँदनी आज धुंधली है 
मन का कमरा भी खाली है 
बादलों के रुख़ से पता लगता है 
तेरा कहना अभी बाक़ी है
हम बैठे हैं इंतजार में, तु चलेगा साथ मेरे 
लेकिन आज भी हाथ खाली है 

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